Thursday, July 16, 2026

12 अगस्त, 2026 को खग्रास सूर्य ग्रहण ON AUGUST 12,2026 TOTAL SOLAR ECLIPSE will be IN CANCER ZODIAC

 

   12 अगस्त, 2026 को रात 9:04 PM IST पर, एक शक्तिशाली खग्रास  (सूर्य ग्रहण) शुरू होगा।  पवित्र श्रावण महीने में बुधवार को पड़ने वाला यह कॉस्मिक अलाइनमेंट बहुत ज़्यादा बदलाव लाने वाली अमावस्या के साथ मेल खाता है। ग्रहण खुद कई घंटों का होगा, लेकिन पवित्र अमावस्या तिथि ( भारतीय मानक समय  23 घंटे और 06 मिनट (  अमावस्या का चरण) तक रहेगा l                                              

    भारतवर्ष में 2026-27 कुल चार ग्रहण बन रहे हैं और उनका विस्तृत विवरण इस प्रकार से दिया गया है:-          .       1.खग्रास सूर्य ग्रहण       (12 अगस्त 2026 ई.बुधवार )       (भारतवर्ष में अदृश्य)।                                                     2. खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण  ( 28 अगस्त 2026 ई. शुक्रवार)    ( भारतवर्ष में अदृश्य)।                                                   3.कंकण सूर्य ग्रहण।      ( 6 फरवरी 2027 ई.  शनिवार)     ( भारतवर्ष में अदृश्य)                                                     4.  चन्द्रमा का उपच्छाया ( 20/21 फरवरी 2027 शनिवार)। (भारतवर्ष में दृश्य)

             ग्रहण प्रारंभ = 21:04;

      सूर्य ग्रहण प्रारंभ = 22:28; 
        ग्रहण का मध्य = 23:14;
   पूर्ण ग्रहण समाप्त = 24:04; 
       ग्रहण समाप्ति = 25:27; 
                                            कुल अवधि = 4 घंटे 23 मिनट।

       

छाया कहाँ  दिखाई देगी?

क्योंकि यह ग्रहण भारत में लोकल रात के समय होगा, इसलिए यह भारत से दिखाई नहीं देगा। इसलिए, भारतीय उपमहाद्वीप में मंदिरों या रोज़ाना के कामों पर पारंपरिक सूतक (आध्यात्मिक शुद्धि) की पाबंदियाँ लागू नहीं होंगी।

हालांकि, पूरी दुनिया में यह ग्रहण शानदार तरीके से दिखेगा:

खग्रास सूर्य ग्रहण:- पूरी दुनियाँ में,  आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी अटलांटिक महासागर, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल में दिखाई देगी।

कनाडा, उत्तर-पूर्वी रूस और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में थोड़ी दिखाई देगा l

ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस और इटली सहित पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप में एक बड़ा 90% आंशिक ग्रहण दिखाई देगा।

ज्योतिषीय अलाइनमेंट: अश्लेषा की ताकत

ज्योतिष के हिसाब से, यह ग्रहण बहुत असरदार है। सूरज, चांद और मरकरी सभी कर्क राशि में एक सीध में होंगे, खासकर रहस्यमयी अश्लेषा नक्षत्र (जिस पर मरकरी का राज है) में।

अश्लेषा सर्प ऊर्जा (नागों) से जुड़ा है, जो गहरी समझ, सुरक्षा, छिपे हुए ज्ञान और अचानक होने वाले बदलावों को दिखाता है। क्योंकि सूरज (हमारी आत्मा/जानवरों की ताकत) और मरकरी (हमारी बुद्धि) यहाँ ग्रहण में हैं:

सोचने-समझने की क्षमता: कुछ समय के लिए आपकी सोचने-समझने की क्षमता थोड़ी धुंधली लग सकती है। यह समय चीज़ों के बारे में बहुत ज़्यादा सोचने-विचारने के बजाय अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर भरोसा करने का है।

पुरानी आदतों को छोड़ना: जैसे साँप अपनी पुरानी खाल उतार देता है, वैसे ही यह ग्रहण हमें पुराने और भारी भावनात्मक बोझ को छोड़ने के लिए प्रेरित करता है।

आध्यात्मिक अभ्यास: भले ही भारत में ग्रहण (या उसकी छाया) दिखाई न दे, फिर भी ग्रहों की यह स्थिति हमारी सूक्ष्म ऊर्जा-शरीर में बदलाव लाती है। इस दौरान ध्यान या मंत्र-जाप के लिए समय निकालना बहुत ज़रूरी है।

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