Sunday, August 16, 2026

28 अगस्त, 2026 आंशिक चंद्र ग्रहण श्रावण मास पूर्णिमा

    28 अगस्त, 2026 को भारतीय मानक समय से सुबह 08:04 से 11:43 के बीच आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण का बीच का समय 9:43 मिनट होगा। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।            

                       


                       



           जब 28 अगस्त, 2026 को पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ेगी, तो यह सांसारिक ज्योतिष  के सबसे दिलचस्प कार्मिक धुरी में से एक को सक्रिय कर देगी: मघा और शतभिषा के बीच का तनाव।

मघा (सिंह राशि) के शाही और पैतृक क्षेत्र पर सूर्य का शासन है और चंद्रमा शतभिषा (कुंभ राशि) के रहस्यमयी, भविष्यवादी जल में डूबा हुआ है; ऐसे में यह आंशिक चंद्र ग्रहण स्थापित सत्ता और ज़मीनी स्तर के नवीनता के बीच टकराव पैदा करता है। मघा विरासत, नेतृत्व और इतिहास के महत्व को दर्शाता है; वहीं शतभिषा—जिस पर राहु का शासन है और जो ब्रह्मांडीय व्यवस्था के देवता वरुण की देखरेख में है—गोपनीयता, क्रांतिकारी उपचार और तकनीकी बदलाव की मांग करता है। भले ही यह ग्रहण भारत के रात के आसमान में दिखाई न दे, लेकिन इसका असर चुपचाप वैश्विक बाज़ारों, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सत्ता संरचनाओं पर पड़ेगा, और एक सवाल खड़ा करेगा: भविष्य में कदम रखने के लिए हमें अतीत की किन चीज़ों को छोड़ना होगा?

ग्रहण शायद ही कभी तुरंत और ज़बरदस्त घटनाएँ पैदा करते हैं; इसके बजाय, वे ब्रह्मांडीय उत्प्रेरक (catalysts) के रूप में काम करते हैं और आने वाले महीनों में छोटी-छोटी प्रतिक्रियाओं की एक श्रृंखला शुरू करते हैं। जैसे ही शतभिषा से छाया हटती है, इस गोचर का संदेश स्पष्ट हो जाता है: इस तेज़ी से जटिल और आपस में जुड़ी दुनिया में आगे बढ़ने के लिए केवल विरासत में मिली सत्ता (मघा) पर निर्भर रहना अब काफ़ी नहीं है। शतभिषा के सौ चिकित्सक हमें याद दिलाते हैं कि सच्चे विकास के लिए लीक से हटकर सोचने, वैज्ञानिक सच्चाई और पुरानी पड़ चुकी परंपराओं को तोड़ने के साहस की ज़रूरत होती है। चाहे वैश्विक स्तर पर हो या हमारे निजी जीवन में, अगस्त 2026 का ग्रहण हमें अपने पूर्वजों द्वारा रखी गई नींव का सम्मान करने और साथ ही भविष्य के अनजान रास्तों को साहस के साथ अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

सूर्य सिंह राशि:-व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा/नेतृत्व  और सामाजिक ज़रूरतों को दर्शाता हैं।   नेतृत्व की जवाबदेही, जन-आंदोलनों और जनता की भावनाओं जैसे विषयों को कैसे उजागर करता हैl  और कुम्भ राशि में चन्द्रमा स्थित हैं और समुदाय या तकनीकी बदलावों के बीच के तनाव पर ध्यान दें।

  कुंभ राशि नेटवर्क, तकनीक, विमानन और डिजिटल एसेट्स को नियंत्रित करती है, जबकि सिंह राशि बाज़ार और नेतृत्व पर शासन करती है।

ग्रहण के दौरान  टेक सेक्टर में अचानक उतार-चढ़ाव, बाज़ार में बदलाव या  अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में नीतिगत बदलावों के होने की संभावना है l

अदृश्य गोचर की शक्ति: भारतवर्ष में ग्रहण अदृश्य रहेगा l

जब किसी क्षेत्र में ग्रहण दिखाई न दे, तो पारंपरिक धार्मिक ग्रंथों के नज़रिए  से व्यावहारिक प्रभाव दिखाई देगा l (जैसे सूतक काल लागू होना, स्थानीय मामलों पर प्रतीकात्मक बनाम भौतिक प्रभाव)।

मघा नक्षत्र: जीवन में सफल होने के लिए, आपको अपने पूर्वजों द्वारा बनाए गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। यह आपके भविष्य में खुशी और समृद्धि लाए।

यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी यह स्थिति प्राचीन ग्रंथों और व्यावहारिक सच के बीच के अंतर —जैसे सूतक काल के अंतर्विरोध और स्थानीय मामलों पर इसके प्रतीकात्मक और भौतिक प्रभाव। यह दर्शाता है कि कैसे वैश्विक ग्रह गोचर स्थानीय स्तर पर सीधे दिखाई न देने पर भी, सांसारिक ज्योतिष में व्यापक रुझानों को तय करते हैं।

दुनिया भर में ग्रहण दिखने का नक्शा: 28 अगस्त, 2026 को ग्रहण कहाँ दिखाई देगा?

दक्षिण/पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका के हर क्षेत्र में इसके दिखने की जानकारी।

टाइम ज़ोन की तुलना (दक्षिण एशिया में दिन का समय जबकि यूरोप और अफ्रीका में रात या शाम)।








Thursday, July 16, 2026

12 अगस्त, 2026 को खग्रास सूर्य ग्रहण ON AUGUST 12,2026 TOTAL SOLAR ECLIPSE will be IN CANCER ZODIAC

     

                                         


                                 




   12 अगस्त, 2026 को रात 9:04 PM IST पर, एक शक्तिशाली खग्रास  (सूर्य ग्रहण) शुरू होगा।  पवित्र श्रावण महीने में बुधवार को पड़ने वाला यह कॉस्मिक अलाइनमेंट बहुत ज़्यादा बदलाव लाने वाली अमावस्या के साथ मेल खाता है। ग्रहण खुद कई घंटों का होगा, लेकिन पवित्र अमावस्या तिथि ( भारतीय मानक समय  23 घंटे और 06 मिनट (  अमावस्या का चरण) तक रहेगा l                                              

    भारतवर्ष में 2026-27 कुल चार ग्रहण बन रहे हैं और उनका विस्तृत विवरण इस प्रकार से दिया गया है:-          .       1.खग्रास सूर्य ग्रहण       (12 अगस्त 2026 ई.बुधवार )       (भारतवर्ष में अदृश्य)।                                                     2. खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण  ( 28 अगस्त 2026 ई. शुक्रवार)    ( भारतवर्ष में अदृश्य)।                                                   3.कंकण सूर्य ग्रहण।      ( 6 फरवरी 2027 ई.  शनिवार)     ( भारतवर्ष में अदृश्य)                                                     4.  चन्द्रमा का उपच्छाया ( 20/21 फरवरी 2027 शनिवार)। (भारतवर्ष में दृश्य)

             ग्रहण प्रारंभ = 21:04;

      सूर्य ग्रहण प्रारंभ = 22:28; 
        ग्रहण का मध्य = 23:14;
   पूर्ण ग्रहण समाप्त = 24:04; 
       ग्रहण समाप्ति = 25:27; 
                                            कुल अवधि = 4 घंटे 23 मिनट।

       

छाया कहाँ  दिखाई देगी?

क्योंकि यह ग्रहण भारत में लोकल रात के समय होगा, इसलिए यह भारत से दिखाई नहीं देगा। इसलिए, भारतीय उपमहाद्वीप में मंदिरों या रोज़ाना के कामों पर पारंपरिक सूतक (आध्यात्मिक शुद्धि) की पाबंदियाँ लागू नहीं होंगी।

हालांकि, पूरी दुनिया में यह ग्रहण शानदार तरीके से दिखेगा:

खग्रास सूर्य ग्रहण:- पूरी दुनियाँ में,  आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी अटलांटिक महासागर, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल में दिखाई देगी।

कनाडा, उत्तर-पूर्वी रूस और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में थोड़ी दिखाई देगा l

ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस और इटली सहित पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप में एक बड़ा 90% आंशिक ग्रहण दिखाई देगा।

ज्योतिषीय अलाइनमेंट: अश्लेषा की ताकत

ज्योतिष के हिसाब से, यह ग्रहण बहुत असरदार है। सूरज, चांद और मरकरी सभी कर्क राशि में एक सीध में होंगे, खासकर रहस्यमयी अश्लेषा नक्षत्र (जिस पर मरकरी का राज है) में।

अश्लेषा सर्प ऊर्जा (नागों) से जुड़ा है, जो गहरी समझ, सुरक्षा, छिपे हुए ज्ञान और अचानक होने वाले बदलावों को दिखाता है। क्योंकि सूरज (हमारी आत्मा/जानवरों की ताकत) और मरकरी (हमारी बुद्धि) यहाँ ग्रहण में हैं:

सोचने-समझने की क्षमता: कुछ समय के लिए आपकी सोचने-समझने की क्षमता थोड़ी धुंधली लग सकती है। यह समय चीज़ों के बारे में बहुत ज़्यादा सोचने-विचारने के बजाय अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर भरोसा करने का है।

पुरानी आदतों को छोड़ना: जैसे साँप अपनी पुरानी खाल उतार देता है, वैसे ही यह ग्रहण हमें पुराने और भारी भावनात्मक बोझ को छोड़ने के लिए प्रेरित करता है।

आध्यात्मिक अभ्यास: भले ही भारत में ग्रहण (या उसकी छाया) दिखाई न दे, फिर भी ग्रहों की यह स्थिति हमारी सूक्ष्म ऊर्जा-शरीर में बदलाव लाती है। इस दौरान ध्यान या मंत्र-जाप के लिए समय निकालना बहुत ज़रूरी है।

Thursday, February 19, 2026

3 मार्च 2026 खग्रास चन्द्र ग्रहण ( 3 मार्च 2026 )


 

                                खग्रास चन्द्र ग्रहण भारतीय मानक समय में विवरण:-    

                   
                              घंटे      मिनट   सेकंड

          ग्रहण-स्पर्श :   15       20       07

          खग्रास-प्रारम्भ :  16-     34-     34
 
           खग्रास मध्य:      17.    03.     46

  खग्रास चन्द्र समाप्ति:     17-   32.     49
           ग्रहण समाप्ति :          18.    47.    15

           कुल समय:               3 घंटे 27 मिनट 





3 मार्च 2026 खग्रास चन्द्र ग्रहण फाल्गुन मास पूर्णिमा दिन मंगलवार दिखाई देगा l चन्द्रमा मघा नक्षत्र में स्थित हैं l चन्द्रमा और केतु सिंह राशि में स्थित हैं और सूर्य और राहु कुम्भ राशि में स्थित हैं l वैसे तो सम्पूर्ण भारतवर्ष सभी महानगरों प्रारम्भ में दिखाई नहीं देगा क्योंकि चन्द्रमा उदय होने का समय सायं काल 5 बजकर 04 मिनट पर होता हैंl भारतवर्ष में मणिपुर के इम्फाल पूर्ण चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा l  कोलकाता,वाराणसी, अहमदाबाद, दिल्ली और, राजस्थान, गुजरात,चंडीगढ़ और भारतवर्ष में पश्चिम भागों में भुज, सोमनाथ, द्वारिका, महाराष्ट्र  ग्रहण समाप्त होने होने वाला है l



      यह चन्द्र ग्रहण विदेशों में पूर्वी यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका के दक्षिण और उत्तरी दिशा में, हिन्द महासागर, पेसिफिक, अटलांटिक, पेरू, कैनेडा, यूस, ताइवान, इंडोनेशिया, हांगकांग, थाईलैंड, उत्तरीकोरिया, सिंगापुर, जापान में चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा l

         पंद्रह दिनों के अंतराल में दो ग्रहण दिखाई दे तो शास्त्रों में अच्छा नहीं मानते हैं l सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र वालों के यह चन्द्र ग्रहण अच्छा नहीं है l महिलाओं, नाचने और गाने, क्षत्रियों, तप करने वालों के लिए कष्ट उठाना पड़ सकता हैं l शिल्पी वर्ग में, क्रय और विक्रय का व्यापार करने वाले लोगों, कवांरी कन्याओं के अच्छा नहीं मानते हैं l राजनैतिक क्षेत्रों में, ब्राह्मण और क्षत्रिय और वैश्य लोगों के लिए अच्छा नहीं है लोगों के व्यवहार में कठोर रहेगी l खाद्यों पदार्थों के भाव बढ़ जाएंगे l

Thursday, January 15, 2026

ON FEBRUARY 17, 2026 ANNULAR SOLAR ECLIPSE WILL BE AQUARIUS ZODIAC

                        

                 An Annular Solar Eclipse will be occur on February 17, 2026

                  On a New Moon day , On Tuesday, Tithi    Amavasya ,

                  Krishna Pakasha , Rashi in which on Solar Eclipse Aquarius

                Rashi Lordship   Saturn

                Timing of Solar Eclipse     3.26 to 7:58 IST

        Planetary position in the Aquarius zodiac on this day :-

      Planet  Degree   Constellation   Lordship.      

      Sun       4.31'      Dhanishta 4     Mars.                       

     Moon     3.28'      Dhanishta 4    Mars.

           Mercury               22.21’           Poorvabhadrapada                               Jupiter

           Venus                   14.33’            Satabhisha                                            Rahu

           Rahu                     15.31              Satabhisha.                                           Rahu

 

 

 

                       In which countries will the solar eclipse on February 17, 2026

                      This solar eclipse will be visible in the southern countries of Africa, including South Africa,                                    Zimbabwe,   Botswana, Mozambique, Zambia, Tanzania, Mauritius, etc., as well as in                                               Antarctica  and the southern  countries of South America, Argentina and Chile. This eclipse                                   will not be visible in India.

                                        An annular solar eclipse will occur on Tuesday, February 17, 2026, from 3:26 PM to 7:58 PM. The eclipse will be visible during the evening hours, from 3:26 PM to 7:58 PM. This annular solar eclipse will take place in the Aquarius zodiac sign, in the constellation of Mars. Both the Sun and the Moon will be in this sign. During this eclipse, the influence of the Sun, Moon, Mars, Rahu, Venus, and Mercury will be felt. The Sun is both the king and the minister this year. Both the Sun and the Moon are situated in the constellation of Mars, while Venus and Rahu are both in Rahu's constellation, Shatabhisha. 

Events happened 

This will create contradictory situations, leading to conflicts. Mars will increase immorality.  There may be an increase in various incidents of arson. The possibility of war in border areas will remain.  Bloodshed is likely in Muslim nations, and there are indications of changes in power. A world war is possible, and with Mars in Capricorn and the conjunction of the Sun, Moon, Venus, Rahu, and Mercury in Aquarius, there may be an increase in sea storms, natural disasters, bloodshed, and social unrest.

                        During pregnancy, pregnant women should take special care and keep them in some measure.

           1. During the solar eclipse and lunar eclipse, pregnant women should not wander out at the time of eclipse. 
          2. Pregnant women should wear binding clothes.
          3. Instead of eating solid as food, juice should be used as fluid.
          4. He should not sleep during the eclipse.
          5. If possible, should chant the name of the Lord.
          6. Pregnant women should not succumb to any work.
          7. Pregnant women should not sit and do the job.
          8. Pregnant women should not wash clothes too.
          9. Pregnant women should not use things such as knives, scissors, because these things have an impact on the child born in the womb. His target is found on his body.
         10. Pregnant women should not use sharp objects during eclipse. It will affect its infant. 
             11.Pregnant women should not cook food nor should they eat something.
             12. Pregnant women should never make copulation during eclipse, they have a bad rite for the child. During donation, pregnant women should donate work.
             13. Pregnant women with Capricorn need to take special care because there may be some problem in the lower part of the body.

Friday, August 29, 2025

21 /22 सितंबर को 2025 सूर्य ग्रहण लगेगा मध्य रात्रि 23 बजे से 22 सितम्बर 2025 को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा


                       यह ग्रहण भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अमावस्या , दिन रविवार 21 /22 सितंबर को 2025 सूर्य ग्रहण लगेगा मध्य रात्रि 23 बजे से 22 सितम्बर 2025 को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा l यह सूर्य ग्रहण भारत वर्ष में दिखाई नहीं देगा l विश्व के कई देशों में आंशिक रूप दिखाई देगा l यह दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका,  पेसिफिक, अटलांटिक,  अंटार्कटिका हिन्द महासागर में आंशिक रूप से सूर्य ग्रहण दिखाई देगा l चिल्ली, अर्जेंटीना, मलावी और दक्षिण जॉर्जिया, नामीबिया, नार्वे, फ्रांस, जिम्बाब्वे, मॉरिशस, तंजानिया आदि देशों भी दिखाई देगा l भारत वर्ष में सूर्य ग्रहण अदृश्य रहेगा l🌞

                    
सूर्य, चंद्रमा और बुध कन्या राशि में स्थित हैं और कन्या राशि पर शनि की दृष्टि हैं l सूर्य, चंद्रमा पर शनि की दृष्टि हैं l राजा को कष्ट उठाना पड़ सकता हैं l मंगल और शनि षडाष्टक योग बना रहे हैं l समाज में मानसिक अशांति बनी रहेगी l आन्तरिक अशांति, उग्रवादी घटनाओं, भूकम्प,लैंडस्लाइड, अनावृटी प्राकृतिक प्रकोप का कारण बनेगा l शनि की दृष्टि मीन राशि पर है और शनि बृहस्पति पर है जो कि देश राजनैतिक दलों चिन्ता मनमुटाव दिखाई देगा l सूर्य की मकर राशि पर, मीन राशि और वृष राशि पर है l कन्या और मीन राशि पर कष्ट उठाना पड़ सकता है l
सूर्य और चंद्रमा दोनों ही उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के तीसरे चरण में हैं l उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य है l सूर्य और चन्द्र ग्रहण 15 दिनों में पड़ रहे हैं और शास्त्रों में यह शुभ नहीं माना जाता हैं l ग्रहण का प्रभाव दिखाई देता हैं l तीन दिन पहले और तीन दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए l ग्रहण का से पहले और सात दिनों तक उत्पात और भूकम्प,  लैंडस्लाइड घटनाएं घटती होती हैं l  6 महीनों तक को शुभ कार्य करना अच्छा नहीं होता हैं lराशियों के अनुसार ग्रहण के प्रभाव

काल पुरुष की कुंडली में बारह भाव होते हैं। यदि ग्रहण मेष, कर्क, तुला और मकर राशियों में हो, तो इसका प्रभाव शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। जबकि ग्रहण स्थिर राशियों, जैसे वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ, में घटित होता है, इसका दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहता है। द्विस्वभाव राशियों, जैसे मिथुन, कन्या, धनु और मीन, में घटित होने वाले ग्रहण का दुष्प्रभाव रुक-रुक कर दिखाई देता है।   सूर्य ग्रहण  कन्या राशि  में घटित होने वाला है l सूर्य और चन्द्र में कन्या राशि में स्थित हैं l यह द्विस्वभाव राशि हैं  l   सूर्य और शनि का समसप्तक योग बना रहे हैं l मंगल और शनि का षडष्टक योग बना रहे हैं जो कि प्राकृतिक प्रकोप भूकम्प लैंडस्लाइड चट्टानों घटनाओं से घटनाओं घटती होने वाली हैं l पर्वतीय प्रदेश वासियों  और वैश्य, व्यापारी वर्ग, और शूद्र जाति के लोगों के अशुभ फल देने वाला है l  रविवार को घटित होने वाला है l राजनेता के कष्ट उठाना पड़ सकता हैं l उग्रवाद घटनाओं और देश में आंतरिक कलह को दर्शाता हैं l किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को पद रिक्त करना पड़ सकता हैं l अशांति बनी रहेगी l 
1. मेष राशि:- मेष राशि वालों के लिए शुभ फलदायी रहेगा। सुख-सुविधाएँ प्राप्त होंगी। धन प्राप्ति के योग हैं।   छठे भाव में सूर्य ग्रहण लग रहा हैं l धन लाभ होगा और मित्रों और रिश्तेदारों से संबंध बिगड़ सकते हैं और नया मित्रों से बन संपर्क हो जाए l मानसिक तनाव होने की संभावना है l स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ी हो सकती हैं l  मौसी और मामा पक्ष के अच्छा नहीं है l दुश्मनों से सावधानी बरतने आवश्यकता है l  
 2.वृष राशि:- वृष राशि वालों के पंचम भाव में सूर्य ग्रहण घटती होने वाला है l संतान पक्ष से परेशानी दिखाई दे रही है l घर परिवार में सुख और शांति रहेगी  l व्यापार वाणिज्य और अन्य कारोबार में लाभ होगा और कभी कभी कोई बाधा आ सकती हैं l आपका खर्चों में वृद्धि होगी l सोच विचार करें कार्य करने से आपको लाभ होगा l प्रेम सम्बन्ध में सावधानी बरतने आवश्यकता है और मन मुटाव हो सकता है l।   
  3.  मिथुन राशि:- मिथुन राशि वालों के चौथ भाव में सूर्य ग्रहण घटती होने वाला है l सरकार कार्यों में बाधा आ सकती हैं   l घर परिवार में सुख और शांति बनाएं रखें l संपत्ति वादविवाद हो सकता है l कोई आपका अपमान की संभावना है और ध्यान रखना चाहिए l।   
   4.    कर्क राशि:-  कर्क राशि वालों के तीसरे भाव में सूर्य ग्रहण घटती होने वाला है l बीमारी से बचने की आवश्यकता है l घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l व्यापार वर्ग को साझेदारी से मतभेद होने पर घाटा होने की संभावना है l कार्य क्षेत्र में उतार चढ़ावा दिखाई दे रहे है l पड़ोसियों से अपने सम्बन्ध अच्छे बना किसी व्यक्ति की अवेहलना मत करें नहीं कष्ट  उठाना पड़ सकता हैं l भगवान श्री शिव जी प्रार्थना करे और पूजा पाठ करना चाहिए l।       
   5. सिंह राशि :- सिंह राशि वालों  जातकों के  दूसरे भाव में सूर्य ग्रहण घटती होने वाला है धन लाभ होगा ध्यान रखना आवश्यक है कि सूर्यआपकी राशि के स्वामी हैं और राजा कष्ट में होने से परिवार में सुख और शांति बनाएं रखें और बच्चों की शिक्षा क्षेत्र में उतार चढ़ावा दिखाई दे रहा  है।  ईश्वर सब अच्छा करेगा। घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l व्यापार वर्ग को साझेदारी से बचाने की जरूरत है और चोरी होना, घाटा होने की संभावना है l विचारों में मतभेद हो सकता हैं और इस बात को लेकर वादविवाद भी हो सकता हैं l हर सोमवार शिव मंदिर में जाना चाहिए और कच्चे दूध में काले तिल से शिव जी पूजा करने से लाभ होगा l         
6. कन्या राशि:-  कन्या राशि वालोंकन्या राशि:-  कन्या राशि वालों जातकों को सुख और शांति बनाएं रखें और आपकी राशि के स्वामी बुध बुद्धि से कार्य करने से हैं l धन लाभ होगा और नए कारोबार करने का अवसर मिलेगा l शत्रुओं पक्ष से परेशानी मिलेगी और घर परिवार में सुख और शांति बनाएं रखें l लेकिन कभी कभी पैतृक संपत्ति पाने में सहायता मिलेगी l ऋण लेने से बचने चाहिए l स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ी हो सकती है l

 7. तुला राशि:- इस राशि के जातकों को सोच-समझकर काम लेना होगा। समय के अनुसार ईश्वर का ध्यान करें। सन्तान पक्ष से खुशी मिलेगी और घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l  मानसिक तनाव होने वाला है और इस समय ध्यान रखना चाहिए l स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ी रहेगी और अचानक से खर्चों में वृद्धि होगी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है l जीवनसाथी को सम्बन्ध अच्छे रहेंगे l लाभ कम हो सकता है l।           
8.   वृश्चिक राशि:- वृश्चिक राशि वालों जातकों स्वास्थ्य में गड़बड़ी रहेगी l आपके घर परिवार में सुख कम होने वाला है अशांति बन सकती हैं और हमेशा शिव जी प्रार्थना करे कि आप सभी व्यक्तियों को मनोबल बढ़ाने में मदद करता है l आय और व्यय समान है l रिश्तेदारों से सहयोग मिलेगा l सम्पत्ति वादविवाद सुलझे, राजपक्ष से लाभ होगा l 
9.धनु राशि:- धनु राशि वालों जातकों स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और जीवनसाथी से सुख मिलेगा l  राजनेता, परिवार के प्रसिद्ध सदस्यों के समय अच्छे  रहेंगे। धन लाभ होगा और कारोबार में उन्नति होगी l सन्तान पक्ष शुभ है l भाई बंधुओं से कष्ट उठाना पड़ सकता हैं l शनि देव की पूजा करने से शांति रहेगी l

 10. मकर राशि:- इस राशि के जातकों को घर-बाहर पूरी बातचीत सोच-समझकर करनी चाहिए, सुख और शांति रहेगी l व्यापार में प्रगति हो l धन हानि उठानी पड़ सकती हैं l रिश्तेदारों और बंधुओं से परेशानी हो सकती है l जीवन साथी से सहयोग मिलेगा l

11. कुम्भ राशि:- इस राशि के जातकों के लिए समय अच्छा है। स्वास्थ्य कमज़ोर, मानसिक तनाव, सन्तान पक्ष शुभ है l आय कम और खर्चों में अधिकता बनी रहेगी l व्यापार में उन्नति होगी और स्त्री पक्ष से खुशी मिलेगी l      
     12. मीन राशि:- शनि देव की साढ़ेसाती चल रही हैं l स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ी हो सकती हैं l घर परिवार में सुख और शांति रहेगी और धन लाभ होगा और खर्चों में कमी आ जाएगी l संतान पक्ष से खुशी मिलेगी l जीवन साथी से प्रेम सम्बन्ध अच्छे रहेंगे l मित्रों और रिश्तेदारों से सहयोग मिलेगा l शनि देव दान करें l

Friday, August 15, 2025

खग्रास चंद्रग्रहण भाद्रपद मास में पूर्णिमा 7/8 सितम्बर 2025 ई.

 विक्रम संवत 2082 में चार ग्रहण आकाश मंडल में दृश्य होगे l निम्नलिखित चारों ग्रहण कर रहे हैं :-

               1. खग्रास चन्द्र ग्रहण 7/8 सितम्बर 2025 ई .                                               2. आंशिक सूर्य ग्रहण 21/22 सितम्बर 2025 ई .                                          3.कंकण सूर्य ग्रहण ( 17 फरवरी 2026 ई .)।                                             4. खग्रास चन्द्र ग्रहण ( मार्च 3, 2025 ई .)।                                         खग्रास चन्द्र ग्रहण भारत वर्ष में दिखाई देंगे l दोनों सूर्य ग्रहण भारत वर्ष में दिखाई नहीं देगे l।         

                सितम्बर 7/8 , 2025 को खग्रास चन्द्र ग्रहण 

खग्रास चन्द्र ग्रहण भाद्रपद मास में पूर्णिमा तिथि, रविवार, तदनुसार 7/8 सितम्बर 2025 ई . को भारत वर्ष में 7 सितम्बर 2025 ई . की रात्रि 9 बजकर 57 मिनट पर खग्रास चन्द्र ग्रहण शुरू होगा और सारे भारत वर्ष में चन्द्र उदय सायं काल 6 बजकर 57 मिनट पर हो चुका होगा l उसके बाद रात्रि 9 बजकर 57 मिनट खग्रास चन्द्र ग्रहण प्रारम्भ हो जाएगा और रात्रि में 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा l भारत वर्ष के सभी शहरों और गांवों में यह ग्रहण दिखाई देगा l प्रारम्भ से मोक्ष रूप में दिखाई देगा l इस चन्द्र ग्रहण और चन्द्र बिम्ब पश्चिम -दक्षिण की ग्रसित होकर उत्तर -पूर्व की ओर से मुक्त होता हुआ दिखाई देगा l विश्व में किन किन स्थानों दिखाई देगा  यह यूरोप, एशिया, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, पश्चिमी - उत्तर - पूर्वी अमेरिका में दिखाई देगा l पेसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिका एवं हिन्द महासागर में खग्रास चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा और भारत में चन्द्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा l इसके साथ साथ ही यह चन्द्र ग्रहण म्यांमार, चीन, नाईजिरिया, थाईलैण्ड, इंडोनेशिया, जर्मनी, रसिया, उत्तरकोरिया, इटली , बंगलादेश, हंगरी, फिलीपींस, ग्रीस, सिंगापुर, रोमानिया, जापान, फ्रांस, स्पेन और भारत वर्ष में अधिकतर भागों में दिखाई देगा l भारत वर्ष के सभी शहरों/ गांवों में यह खग्रास चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा l ब्राजील के पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा l

     खग्रास चन्द्र ग्रहण के स्पर्शादि समय भारतीय मानक समय इस प्रकार हैं l                                                                         

                             घंटा.    मिनट     सैंकड 

             ग्रहण स्पर्श:    21 -    57.     - 09 

           खग्रास प्रारम्भ:   23.    -00     -48 

              ग्रहण मध्य   : 23.   - 41      -47 

          खग्रास समाप्त :  01.    -22.     -51 

   चन्द्र ग्रहण समाप्त   : 01-    26      -31   

                  पर्व काल:  3 घण्टे 29 मिनट 

                      परम ग्रास मान 1.362

                        


         खग्रास चन्द्र ग्रहण का सूतक काल 7 सितम्बर 2025 ई. को 12 बजकर 57 मिनट प्रारम्भ हो जाएगा l महा श्राद्ध में ग्रहण सूतक लगा रहेगा l सूतक काल में भोजन पकाने वर्जित माना जाता हैं l किसी घर परिवार में कोई श्राद्ध हो तो सूतक काल से पहले सब कार्य कर ले l दान करने के फलों को दान धर्म कर्म करने चाहिए l  कुम्भ राशि में चन्द्रमा का गोचर करेंगे और चन्द्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में स्थित हैं l शनि देव राशि के स्वामी हैं और राहु और बृहस्पति का अधिपत्तित्व होता है l कुम्भ राशि के समय घटित हो रहा है और यह सब अधिक अशुभ और कष्ट प्रद रहेगा l
          मेष राशि वालों को अच्छा रहेगा और लाभ प्राप्त होगा l वृष राशि वालों को सुख और समृद्धि आने वाली हैं l मिथुन राशि वालों को राहु और चंद्रमा की दृष्टि से अपमान होने की संभावना है और ध्यान रखना चाहिए l कर्क राशि वालों को समय ठीक नहीं हैं l कष्ट उठाना पड़ सकता हैं l भगवान श्री शिव जी प्रार्थना करे और दान धर्म और पूजा पाठ करें l सिंह राशि वालों को सावधानी बरतने आवश्यकता है l केतु और सूर्य आपकी राशि में गोचर कर रहे हैं और राहु और चंद्रमा की दृष्टि पड़ रही हैं l जीवनसाथी को कष्ट उठाना पड़ सकता हैं l  कन्या राशि वालों को घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l वाहन चलाते समय ध्यान रखें l तुला राशि वालों को समय उत्तम नहीं है और घर परिवार में चिन्ता बनी रहेगी और ईश्वर की आराधना करें l वृश्चिक राशि वालों को समय ठीक नहीं हैं और प्रभु श्रीराम जी पूजा पाठ करना चाहिए l भगवान श्री राम सब कष्टों को दूर कर देते हैं l धनु राशि वालों का समय उत्तम और शांति मिलेगी l धन लाभ होगा और खर्चों में वृद्धि होगी l मकर राशि वालों को व्यापार और वाणिज्य करते समय ध्यान रखें और हानि उठानी पड़ सकती हैं l कुम्भ राशि वालों के लिए समय अच्छा नहीं है l शनि देव की पूजा पाठ करें और दान करें l चोट लगने का भय बना रहे गा और वाहन चलाते समय ध्यान रखें l मीन राशि वालों पर शनि देव विराजमान हैं और कार्य क्षेत्र में सावधानी बरतने आवश्यकता है और व्यापार में लेन देन सोच विचार करें नहीं हानि उठानी पड़ सकती हैं l
राशियों के अनुसार ग्रहण के प्रभाव

काल पुरुष की कुंडली में बारह भाव होते हैं। यदि ग्रहण मेष, कर्क, तुला और मकर राशियों में हो, तो इसका प्रभाव शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। जबकि ग्रहण स्थिर राशियों, जैसे वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ, में घटित होता है, इसका दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहता है। द्विस्वभाव राशियों, जैसे मिथुन, कन्या, धनु और मीन, में घटित होने वाले ग्रहण का दुष्प्रभाव रुक-रुक कर दिखाई देता है। चंद्र ग्रहण  कुम्भ राशि  में घटित होने वाला है l सूर्य सिंह राशि में स्थित हैं l यह दोनों स्थिर राशियां हैं l चंद्रमा के साथ राहु युति में हैं सिंह राशि में सूर्य, केतु और बुध स्थित है l  समसप्तक योग बना रहे हैं l प्राकृतिक प्रकोप भूकम्प लैंडस्लाइड चट्टानों घटनाओं से घटनाओं घटती होने वाली हैं l पर्वतीय प्रदेश वासियों को बोझा ढाने वाले, चोर, अहीर, उत्तरी कश्मीर और दक्षिण रूस के साथ लगने वाले प्रदेश, प्रधान शासकों, सिंह, उत्तरी अफ्रीका के रहने वाले के अशुभ होता है l वैश्य, व्यापारी वर्ग, और शूद्र जाति के लोगों के अशुभ फल देने वाला है l  रविवार को घटित होने वाला है l पूर्वाभद्रापदा नक्षत्र में ग्रहण घटती होने वाला है और हिंसक, पशुपालक, चोर, अधर्मी, नीच वृत्ति लोगों,, युद्ध जन्य प्रवृत्ति को कष्ट दर्शाता हैं l 
मेष राशि:- मेष राशि वालों के लिए शुभ फलदायी रहेगा। सुख-सुविधाएँ प्राप्त होंगी। धन प्राप्ति के योग हैं। आपके ग्यारहवें भाव में चन्द्र ग्रहण लग रहा हैं l धन लाभ होगा और मित्रों और रिश्तेदारों से संबंध बिगड़ सकते हैं और नया मित्रों से बन संपर्क हो जाए l मानसिक तनाव होने की संभावना है l स्वास्थ्य अच्छा रहेगा l                  वृष राशि:- वृष राशि वालों के दशम भाव में चन्द्र ग्रहण घटती होने वाला है l कार्य क्षेत्र में उतार चढ़ावा दिखाई देता है l घर परिवार में सुख और शांति रहेगी  l व्यापार वाणिज्य और अन्य कारोबार में लाभ होगा और कभी कभी कोई बाधा आ सकती हैं l आपका खर्चों में वृद्धि होगी l सोच विचार करें कार्य करने से आपको लाभ होगा l।      मिथुन राशि:- मिथुन राशि वालों के नवम भाव में चन्द्र ग्रहण घटती होने वाला है l पिता जी की स्वास्थ्य अच्छा नहीं है बीमारी बढ़ जाएगी और ध्यान रखना चाहिए l धार्मिक स्थानों की यात्राओं का आयोजन करना चाहिए l घर परिवार में संपत्ति वादविवाद हो सकता है l कोई आपका अपमान की संभावना है और ध्यान रखना चाहिए l।        कर्क राशि:-  कर्क राशि वालों के अष्टम भाव में चन्द्र ग्रहण घटती होने वाला है l बीमारी से बचने की आवश्यकता है l घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l व्यापार वर्ग को साझेदारी से मतभेद होने पर घाटा होने की संभावना है l कार्य क्षेत्र में उतार चढ़ावा दिखाई दे रहे है l कर्क राशि के स्वामी पर ग्रहण घटती हो रहा हैं और स्वामी जी कष्ट में प्रजा को कष्ट उठाना पड़ जाता हैं l भगवान श्री शिव जी प्रार्थना करे और पूजा पाठ करना चाहिए l
सिंह राशि :- सिंह राशि वालों  जातकों के लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि चंद्रमा और राहु तथा सूर्य और केतु के साथ होने से पति-पत्नी को चोट लगने की संभावना है। किसी पर दोषारोपण करके उसका अपमान न करें, ईश्वर सब अच्छा करेगा। घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l व्यापार वर्ग को साझेदारी से बचाने की जरूरत है और चोरी होना, घाटा होने की संभावना है l विचारों में मतभेद हो सकता हैं और इस बात को लेकर वादविवाद भी हो सकता हैं l हर सोमवार शिव मंदिर में जाना चाहिए और कच्चे दूध में काले तिल से शिव जी पूजा करने से लाभ होगा l।           कन्या राशि:-  कन्या राशि वालों को सुख और समृद्धि आने वाली हैं l धन लाभ होगा और नए कारोबार करने का अवसर मिलेगा l सन्तान पक्ष से खुशी मिलेगी और घर परिवार में खुशियों से भर जा सकता हैं लेकिन कभी कभी पैतृक संपत्ति पाने में सहायता मिलेगी l मंगल और दंगल में काम करने वाला है और परेशानी हो सकती हैं l
तुला राशि:- इस राशि के जातकों को सोच-समझकर काम लेना होगा। समय के अनुसार ईश्वर का ध्यान करें। पंचम भाव में चन्द्र ग्रहण घटती होने वाला है और सन्तान पक्ष से खुशी मिलेगी और घर परिवार में सुख और शांति रहेगी l सन्तान पक्ष को मानसिक तनाव होने वाला है और इस समय ध्यान रखना चाहिए l स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ी रहेगी और अचानक से खर्चों में वृद्धि होगी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है l अधिक चिन्ता करने से लाभ कम हो सकता है l।             वृश्चिक राशि:- वृश्चिक राशि वालों जातकों को चौथे स्थान पर चन्द्र ग्रहण घटती होने वाला है l आपके घर परिवार में सुख कम होने वाला है अशांति बन सकती हैं और हमेशा शिव जी प्रार्थना करे कि आप सभी व्यक्तियों को मनोबल बढ़ाने में मदद कर सकता हैं l राहु की वजह से अचानक से बदलाव आ रहा हैं जो आप सभी को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता हैं और व्यापारी वर्ग को साझेदारी से मतभेद हो सकते हैं l



Friday, March 7, 2025

29 मार्च 2025 शनिवार को अमावस्या पर खण्डग्रास सूर्य ग्रहण


      29 मार्च 2025 शनिवार को अमावस्या पर खण्डग्रास सूर्य ग्रहण दिखाई देगा l यह खण्डग्रास सूर्य ग्रहण चैत्र अमावस्या शनिवार 29 मार्च 2025 ई को भारतवर्ष मानक समय अनुसार दोपहर दो बजकर 21 मिनट से सायं 18 बजकर 10 मिनट तक होगा l 

 भारतवर्ष में खण्डग्रास सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा l यह यूरोप के कुछ देशों में, उत्तर पश्चिमी देश अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में, रूस के उत्तरी भाग में,  दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भाग, एटलांटिक और आर्कटिक महासागर में दिखाई देगा l  

मुख्य  देशों में आस्ट्रेलिया और कनाडा के पूर्वी भाग डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीनलैण्ड, हंगरी और इटली, स्पेन, यूक्रेन, इंग्लैंड , अमेरिका के पूर्वी भाग में, पुर्तगाल, स्वीडन ,नॉर्वे, उत्तरी रूस में दिखाई देगा l

     29 मार्च 2025 को आकाश मंडल में ग्रहों की स्थिति बनी हुई है और यहां पर उसका उल्लेख किया गया है कि सूर्य और चंद्रमा दोनों ही मीन राशि में स्थित हैं l मीन राशि में छै ग्रहों की योग बन रहा हैं  l 

     उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र में चार ग्रह स्थित हैं और गुरु राशि के स्वामी हैं और नक्षत्रपति शनि देव हैं l

    मीन राशि काल पुरुष की अन्तिम पड़ाव पर है l मृत्यु शय्या पर के पिछले पांव माना जाता हैं l जो कि इस लोक को छोड़ कर परलोक सिधार का संकेत देता  हैं l प्रलय आने वाली हैं l विश्व युद्ध होने वाली हैं l जैसा 1962 में युद्ध हुआ था l इसके मुख्य देव श्री शिव जी हैं l जो सर्पों की माला पहने हुए रहते हैं l पित्त कारक नक्षत्र माना जाता हैं और पृथ्वी के केंद्र भाग से है जो कि सर्वदा गरम भाग हैं और पृथ्वी में ज्वाला मुखी फटने पर बाहर निकलने को व्याकुल रहता है l  शनि और राहु दोनों ही ग्रह पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में स्थित हैं l अनिष्ट और अशुभ फल देते हैं l नक्षत्रों का चित्रण एक दैत्यों, रक्तरंजित तलवार, मुर्दे की खोपड़ी एवं हड्डियो इसे मृत्यु का दर्शाता हैं और बीसवीं शताब्दी के विश्व युद्ध को दर्शाता हैं मानव बलि लेने वाले देवता के अधीन हैं l 

          चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण दोनों ही पंद्रह दिनों बीच है जहां पर ग्रहण दिखाई देगा और वहां के राजा को कष्ट उठाना पड़ सकता है l यह हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है l कोई भी ग्रहण आरम्भ होने से तीन दिन पहले कोई शुभ कार्य वर्जित होता हैं और ग्रहण दिखाई देने के बाद तीन दिनों तक शुभ कार्य वर्जित माना गया है l किसी भी देश में ग्रहण दिखाई देगा तो उसका प्रभाव छह महीने तक दिखाई देता हैं  l जिस राशि और जन्म कुण्डली चंद्रमा स्थित है और उसमें पूर्वा भाद्र पद और उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र स्थित हैं सिंह और मीन राशि वालों को ध्यान रखना चाहिए l 

      सूर्य ग्रहण का प्रारम्भ समय = 14 बजकर 21 मिनट 

              खण्डग्रास  सूर्य ग्रहण =14 बजकर 21 मध्य मिनट 

                              परम ग्रास 16 बजकर 17  मिनट 

           ग्रहण समाप्ति समय  =  18 बजकर 14 मिनट ग्रहण 

  लाल रंग चन्द्र = सूर्य अपने उग्र रूप में ग्रहण जो कि राजा और मंत्री को समस्या होगी l बीमारी का समावेश होगा l मानसिक रूप से ग्रसित होने से खुदकुसी होने की संभावना है हृदय रोग, कोई पुरानी बीमारी दुबारा से हो सकती हैं l वायु और जल की संभावना है l अमेरिका पूर्वी भाग और दक्षिण भाग को अधिक प्रभाव शाली है और मुद्रा स्थिति में गिरावट आएगी और शेयर बाजार में भारी गिरावट आ जाएगी l जो कि देशों में हलचल मच जाएगी l युद्ध होना निश्चित है l जनता को परेशानी आ जाएगी l 

Thursday, March 6, 2025

14 मार्च 2025 खग्रास चन्द्र ग्रहण ( 14 मार्च 2025 )



             हमारे सौर मंडल में सूर्य एक ग्रह की जिस के इर्द गिर्द सभी ग्रह और तारे घूमते हैं।सूर्य का गुरुतवाकर्षण होता है।पृथ्वी उसके इर्द गिर्द चक्कर काटती है।चन्द्र भी पृथ्वी इर्द गिर्द घूमता है।चन्द्रमा जब आकाश में घूमते हुए पृथ्वी की छाया वाले मार्ग से गुजरता है,तब चन्द्र ग्रहण होता है।ऐसा तभी होता हैकि जब सूर्य,चन्द्र और पृथ्वी तीनो एक सीधी रेखा में आ जाते है।चन्द्रमा की कक्षा क्रांति तल पर लगभग 5° का कोण बनाती हैं।

इस विक्रम संवत 2081 में भूमण्डल पर चार ग्रहण घटित होने जा रहे हैं।यह ग्रहण निम्नलिखित है:-   

 1. दो चन्द्र ग्रहण 2. दो सूर्य ग्रहण होंगे। 

   1.प्रथम खग्रास चन्द्र ग्रहण ( 18 -9- 2024)    

  2.कँकणाकृति सूर्य ग्रहण (2/ 3 -10-2024) 

 3. खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण (14-3- 2025) 

 4.खग्रास सूर्य ग्रहण ( 29 -3-2025)




                    खग्रास चन्द्र ग्रहण ( 14 मार्च 2025 ) यह खग्रास चन्द्र ग्रहण फाल्गुन मास पूर्णिमा, शुक्रवार के दिन प्रातः: 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर दो बजकर 18 मिनट तक रहेगा l   

              चन्द्र ग्रहण का प्रारम्भ समय = 10 बजकर 40 मिनट

                           खग्रास चन्द्र ग्रहण =11 बजकर 56 मिनट 

                              परम ग्रास =.       12 बजकर 29 मिनट  

            खग्रास ग्रहण समाप्ति समय  =  13 बजकर 01 मिनट

                       ग्रहण समाप्त समय =   14 बजकर 18 मिनट   

                        कुल समय = 1 घंटा - 05 मिनट  

    लाल रंग चन्द्र ग्रहण जो कि राजा और मंत्री को समस्या होगी l बीमारी का समावेश होगा l मानसिक रूप से ग्रसित होने से खुदकुसी होने की संभावना है हृदय रोग, कोई पुरानी बीमारी दुबारा से हो सकती हैं l वायु और जल की संभावना है l 

   भारतवर्ष में खग्रास चन्द्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा l            

 यह चन्द्र ग्रहण यूरोप, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका, प्रशान्त एटलांटिक, आर्कटिक महासागर, पूर्वी एशिया और अंटार्टिका में देखा जा सकता हैं l  मुख्य रूप शहरों में शिकागो, न्यूयॉर्क, मांट्रियल, लॉस एंजिल्स, वाशिंगटन, मेक्सिको, चिली और ब्राज़ील में दिखाई देगा l  

 यूरोप के मुख्य शहरों में दिखाई देगा ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन चन्द्रास्त  के समय दिखाई देगा l  

  आस्ट्रेलिया के मुख्य शहरों में मेलबर्न, सिडनी, पूर्वी एशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, फिजी में जा सकता हैं l  

      चन्द्र ग्रहण का कुल समय एक घंटा 05 मिनट तक चल परम ग्रास 12 बजकर 29 मिनट पर है और ग्रहण का समापन दोपहर दो बजकर 18 मिनट तक है l          

यह ग्रहण सूर्य और शनि कुम्भ राशि में स्थित हैं और चंद्रमा सिंह राशि में स्थित हैं l राहु, वक्री शुक्र और बुध मीन राशि में स्थित हैं l मंगल मिथुन राशि में स्थित हैं और बृहस्पति वृष राशि में गोचर कर रहे हैं l दो ग्रह उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में स्थित और तीन ग्रह पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में स्थित हैं l शनि की राशि में सूर्य और शनि स्थित हैं l प्राचीन ऋषियों के मतानुसार पूर्वभाद्रपद नक्षत्र को शय्या के अगले पांव और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के पिछले पाँव माना जाता हैं l पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र की प्रतीक तलवार काम, अंहकार, सत्ता और धन का नाश माना जाता हैं l पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता अज एक-पाद है जो कि एक पैर बकरा हैं और अन्तिम अवस्था को प्रलयकारी शिव, रौद्र रूप से तांडव नृत्य करते हैं l क्रूर, पिचाश को दर्शाता हैं l  विश्व युद्ध होने वाली हैं l

Thursday, April 4, 2024

8 अप्रैल 2024 विक्रमी संवत 2080 अन्तिम खग्रास सूर्य ग्रहण

 विक्रमी संवत 2080 का अंतिम  सूर्य  हैं । 08 अप्रैल 2024  को अन्तिम  खग्रास सूर्य ग्रहण दिखाई देगा ।


                  विक्रम संवत 2080 चंद्र मास वैशाख तिथि कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि सोमवार  भारतीय मानक समय रात्रि  21: 12  बजे सूर्य ग्रहण प्रारंभ होगा और मध्यरात्रि  02 :23  बजे तक रहेगा। मकर  लग्न की कुण्डली  बन  रही  है। सूर्य, चंद्र, राहु और मंगल  मीन  राशि का स्वामी गुरु  है। सूर्य, चंद्र, राहु तीनों  रेवती  नक्षत्र में स्थित हैं। और मंगल शतभिषा नक्षत्र में  स्थित  है।

    सूर्य, चंद्र, राहु तीनों  रेवती  नक्षत्र में स्थित हैं। शनि और मंगल कुम्भ राशि  में  स्थित  है।। शनि देव जी की दृष्टि  कुम्भ  राशि में स्थित गुरु और बुध  के ऊपर है। राजनीति की दृष्टि से यह समय ठीक नहीं है। इससे कुछ राज्यों में साम्प्रदायिक दंगे और उग्रवाद की घटित होने की आशंका है। देश की सीमाओं पर अशांति रहेगी।  खग्रास सूर्य ग्रहण की अवधि छः घंटे  है। इस ग्रहण का  उत्तर और दक्षिण अमेरिका ,  पश्चिम यूरोप ,पेसिफ़िक , अटलांटिक सागर में दिखाए देगा |   सूर्य ग्रहण यूएस , कैनेडा , फ्रेंच , क्रिसमस , आइजलैंड , कुक , गोटेमाला ,क्यूबा , बरमूडा , पुर्तगाल में आकृति  दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। कभी-कभी सूर्य ग्रहण का प्रभाव पांच घंटे, पांच दिन, पांच महीने और पांच साल में दिखाई देता है। जिस देश में सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा है, उस देश के राजा पर यह दृष्टिगोचर होगा।


                           सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह से आ जाता है कि वह सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक सकता है। यह तभी हो सकता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के केंद्र लगभग एक सीधी रेखा में हों। उस समय सूर्य और चंद्रमा के देशांतर एक समान होते हैं। जैसा कि चंद्र ग्रहण में पहले ही बताया जा चुका है कि पृथ्वी और सूर्य हमेशा अण्डाकार पर रहते हैं, जबकि चंद्रमा का रोहित 5° के कोण पर लगभग अण्डाकार होगा। इसलिए चंद्रमा हमेशा अण्डाकार पर नहीं होता है। यह ग्रहण पर होता है जब यह राहु और केतु के साथ मेल खाता है जो चंद्रमा के नोड हैं।


Tuesday, August 1, 2023

ANNULAR SOLAR ECLIPSE ON OCTOBER 14, 2023

 

                                              




    On October 14, 2023, the Kankan solar eclipse will start at 20:34 on October 15, 2023, and will end at 2:25 on October 15, 2023, on the new moon day of Ashwin month, Saturday. Kankan solar eclipse view will not be visible in India. Shanaishchari Sarvapitri Amavasya Tithi and Tithi are going to fall on 14 October 2023, Saturday night. The horoscope of Gemini Ascendant is being prepared. At 23:21 in the night, the peak eclipse period will be there. The solar eclipse will appear in the shape of a ring. Jupiter and Rahu will transit in Aries and Mars Ketu is posited in Libra, Venus is posited in Leo, Moon, Sun, and Mercury are posited in Virgo and Saturn will transit in Aquarius, and Saturn's vision of Rahu in Aries. Is together and Jupiter will be above Saturn-Mars Samsaptak Yoga is being formed, due to which there are indications of natural calamities, severe earthquakes and storms in India, and floods in the states of Himachal Pradesh, Assam, Gujarat, and Uttarakhand. due to heavy rains. Chances are being made to come. There is going to be a big fire. This can cause huge damage. Retrograde planets in the horoscope will cause great calamity for a particular person.

This eclipse will be visible in countries like America, Mexico, Belize, Handers, Panama, Brazil, Colombia, etc.  Apart from this, in some parts of America, Canada, Colombia, Cuba, Guatemala, Salvador, Honduras, Semana, Peru, etc. countries, the shape of a partial solar eclipse will also be visible.

Tuesday, April 18, 2023

20 अप्रैल 2023 विक्रमी संवत 2080 प्रथम खग्रास सूर्य ग्रहण

          

                     विक्रमी संवत 2080 का आरम्भ हो चुका हैं और इस वर्ष में हमारे भूमंडल पर चार ग्रहण दिखाई  देते हैं । इसमें तीन सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। 20 अप्रैल 2023 को प्रथम खग्रास सूर्य ग्रहण दिखाई देगा ।

                  विक्रम संवत 2080 चंद्र मास वैशाख तिथि कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि गुरुवार भारतीय मानक समय प्रातः 07:05 बजे सूर्य ग्रहण प्रारंभ होगा और दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा। मेष लग्न का राशिफल तैयार किया जा रहा है। सूर्य, चंद्र, राहु और बुध मेष राशि का स्वामी मंगल है। सूर्य, चंद्र और राहु तीनों अश्विनी नक्षत्र में स्थित हैं। नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। चंद्रमा और बृहस्पति दोनों ग्रह दहन अवस्था में स्थित हैं। शनि देव जी की दृष्टि सूर्य, चंद्र, राहु और मेष लग्न के ऊपर है। राजनीति की दृष्टि से यह समय ठीक नहीं है। देश में किसी व्यक्ति विशेष की मृत्यु होगी और जनता को कष्ट होगा। सभी ग्रह मंगल और शनि से घिरे हुए हैं। इससे कुछ राज्यों में साम्प्रदायिक दंगे होने की आशंका है। देश की सीमाओं पर अशांति रहेगी। इस ग्रहण का समय सुबह से शुरू हो जाएगा. खग्रास सूर्य ग्रहण की अवधि पांच घंटे 24 मिनट है। इसका असर पूरी दुनिया में दिखेगा। पेनुमब्रल सूर्य ग्रहण दक्षिणी महाद्वीप में अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण हिंद महासागर, इंडोनेशिया, फिलीपींस में दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। कभी-कभी सूर्य ग्रहण का प्रभाव पांच घंटे, पांच दिन, पांच महीने और पांच साल में दिखाई देता है। जिस देश में सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा है, उस देश के राजा पर यह दृष्टिगोचर होगा।

                           सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह से आ जाता है कि वह सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक सकता है। यह तभी हो सकता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के केंद्र लगभग एक सीधी रेखा में हों। उस समय सूर्य और चंद्रमा के देशांतर एक समान होते हैं। जैसा कि चंद्र ग्रहण में पहले ही बताया जा चुका है कि पृथ्वी और सूर्य हमेशा अण्डाकार पर रहते हैं, जबकि चंद्रमा का रोहित 5° के कोण पर लगभग अण्डाकार होगा। इसलिए चंद्रमा हमेशा अण्डाकार पर नहीं होता है। यह ग्रहण पर होता है जब यह राहु और केतु के साथ मेल खाता है जो चंद्रमा के नोड हैं।


Tuesday, October 25, 2022

खग्रास चंद्रग्रहण कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार 8 नवंबर 2022 ई.

 

          जब चंद्रमा आकाश में घूम रही पृथ्वी की छाया की कक्षा से होकर गुजरता है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह तभी होगा जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सभी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाएं। सूर्य और पृथ्वी हमेशा अण्डाकार पर होते हैं लेकिन चंद्रमा का मार्ग लगभग 5 डिग्री के कोण पर अण्डाकार की ओर झुका होता है ताकि जब पृथ्वी सूर्य और के बीच में हो तो चंद्रमा अण्डाकार पर या बहुत निकट हो या न हो। पूर्णिमा पर चंद्रमा। जब चंद्रमा अण्डाकार पर या उसके निकट हो और पृथ्वी उनके बीच में हो, तो ऐसी स्थिति तब होगी जब चंद्रमा या तो राहु या केतु पर या उनके पास हो क्योंकि राहु और केतु चंद्रमा के नोड हैं।

              यह पूर्ण चंद्र ग्रहण का मामला है। चंद्र ग्रहण तब तक नहीं हो सकता जब तक चंद्रमा की सतह का एक हिस्सा उम्ब्रा में प्रवेश नहीं कर लेता। ऐसा इसलिए है क्योंकि सूर्य के प्रकाश का चंद्रमा पर पड़ने वाला प्रकाश केवल कम होता है, सीधे नहीं रुकता; जबकि उम्ब्रा में सूर्य की कोई सीधी किरण प्रवेश नहीं कर सकती। इसकी चमक कम हो जाती है, फिर जब चंद्रमा आंशिक रेखा के किनारे पर होता है तो इसका आकार छोटा हो जाता है।


                                   


          खग्रास चंद्रग्रहण कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार 8 नवंबर 2022 ई. को भारतवर्ष में आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। यह ग्रहण उत्तर पूर्वी यूरोप, अमेरिका उत्तरी/दक्षिणी, आस्ट्रेलिया तथा पैसिफिक सागर, यह खग्रास चंद्रग्रहण दिखाई देगा।  मेष राशि में चंद्र और राहु और तुला राशि में सूर्य,केतु,बुध और शुक्र है। चंद्र ग्रहण भारतीय मानक समय 16 बजकर 29 मिनट 09 सेकण्ड पर आरम्भ होगा। शनि की दशम दृष्टि से सूर्य को देख रहे हैं। 15 दिनों में दो ग्रहण पृथ्वी पर दिखाई देते अच्छे प्रतीत नहीं होता है। ☀️ और चंद्र  ग्रहण शुभता नही दिखते है। मेष राशि में चंद्र भरणी नक्षत्र में स्थित है व्यतिपात योग ऊपर से दिन मंगलवार है और राहु भी भरणी नक्षत्र में स्थित है। मंगल ग्रह वक्री अवस्था में अपने ही नक्षत्र मृगशिरा में स्थित है। तुला राशि में सूर्य नीच राशि में स्थित है, शुक्र-बुध-केतु की युति के कारण शनि की विशेष दृष्टि है और शनि भी मंगल की दृष्टि से है और जिससे प्रचंड प्राकृतिक प्रकोप से जनता परेशान होगी, आग, महामारी का प्रकोप। कुछ राज्यों में हिमपात, बर्फबारी, भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं हो सकती हैं। मुस्लिम देशों में सत्ता परिवर्तन की संभावना है। आसमान में गिरने की संभावना है। भारी गिरावट होगी और भयानक माहौल और अप्रिय घटनाओं के भी संकेत हैं।

               

      

           यदि दो ग्रहण एक सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण एक ही महीने के दौरान 15 दिनों के भीतर होता है, तो राजा और उसकी सेना के विनाश का सामना करना पड़ा है और खूनी लड़ाई संभव है। प्रभाव एक दिन पहले शुरू होता है और अगले ग्रहण तक रहता है। ग्रहणों के प्रभाव सप्ताह या महीने और अगले ग्रहण की अवधि हो सकते हैं। जातकों पर ग्रहण का प्रभाव नौकरी, शिक्षा और व्यवसाय से जातक को जा सकता है और पुरुष जातकों को अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है।

            लेकिन चंद्र ग्रहण उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिणी राज्यों, पाकिस्तान, ईरान, इराक और अफगानिस्तान में दिखाई नहीं देगा। लेकिन भारत के पूर्वोत्तर और मध्य पूर्व के कुछ हिस्से दिखाई देंगे। चंद्र ग्रहण इंग्लैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, उत्तरी स्वीडन, उत्तरी फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। परनंबर की अवधि चंद्र ग्रहण 3 घंटे 40 मिनट (14:39 से 18:19 तक) होगा चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा आकाश में पृथ्वी की छाया से गुजरता है। चंद्र ग्रहण तभी होगा जब तीनों पौधे यानी सूर्य और पृथ्वी हमेशा ग्रहण पर होंगे लेकिन चंद्रमा का मार्ग लगभग पांच डिग्री के कोण पर अण्डाकार की ओर झुका हुआ है। इसलिए जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में होती है यानी पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अण्डाकार के पास हो भी सकता है और नहीं भी।

                   भारतीय स्टैंडर्ड समय  = 14 :39:16 

                         ग्रहण - मध्यम        = 16 :29   

                        ग्रहण - समापन         = 18 :19                        

लेकिन चंद्र ग्रहण हर पूर्णिमा पर नहीं दिखता है, यह तब होता है जब चंद्रमा राहु या केतु हो और ग्रहण के निकट हो। जब चंद्रमा की पूरी डिस्क को मनाया जाता है, तो ग्रहण को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है और जब इसका केवल एक हिस्सा अस्पष्ट होता है तो इसे आंशिक ग्रहण कहा जाता है।

Thursday, October 6, 2022

खण्डग्रास सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर 2022

               

                         सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह से आ जाता है कि वह सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक सकता है। यह तभी हो सकता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के केंद्र लगभग एक सीधी रेखा में हों। उस समय सूर्य और चंद्रमा के देशांतर एक समान होते हैं। जैसा कि चंद्र ग्रहण में पहले ही बताया जा चुका है कि पृथ्वी और सूर्य हमेशा अण्डाकार पर रहते हैं, जबकि चंद्रमा का रोहित 5° के कोण पर लगभग अण्डाकार होगा। इसलिए चंद्रमा हमेशा अण्डाकार पर नहीं होता है। यह ग्रहण पर होता है जब यह राहु और केतु के साथ मेल खाता है जो चंद्रमा के नोड हैं।

इसलिए, सूर्य ग्रहण के लिए दो आवश्यक शर्तें हैं और वही हैं: -


   1. चंद्रमा राहु या केतु में या उसके पास होना चाहिए।

   2. उस समय अमावस्या समाप्त होनी चाहिए।

                                                                             


                             25 अक्टूबर 2022 को विक्रम संवत 2079 चन्द्र मास कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या योग प्रतिक्रमण नाग ,दिन मंगलवार तुला राशि में सूर्य -चन्द्र - शुक्र और केतु विराजमान हैं और ग्रह स्वाति नक्षत्र में स्थित है, जिनके स्वामी राहु है।इसी दिन दीपावली का पर्व भी है।चन्द्र - बुध-शुक्र दहन अवस्था में गोचर कर रहे हैं।

                                   ग्रहण का प्रारंभ का समय = 2 बजकर 29 मिनट   

                      ग्रहण का मध्य समय = 4 बजकर 29 मिनट 

                       ग्रहण का समाप्त काल = 6 बजकर 33 मिनट 

                        ग्रहण की अवधि 4 घण्टा 04 मिनट

सूर्य अपनी नीच राशि तुला और तुला राशि के स्वामी शुक्र अपनी दहन स्थिति में है और उसके ऊपर शनि की विशेष दृष्टि और शनि के मंगल की दृष्टि हैं।ये सभी ग्रहों की भयंकर प्राकृतिक प्रकोप, भूकंप, अग्निकांड, महामारी की संकेत दे रही है।आमावस के मंगल देवता का मंगलवार हैं जो मुस्लिम देशों में सत्ता परिवर्तन के योग का निर्माण कर रहे है।अमावस्या की काली रात्रि अनिष्टकारी घटनाओं का संकेत दे रही हैं।

                           

                                                        



 तुला राशि और स्वाति नक्षत्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाऐगा। इन से संबंधित व्यक्तियों को दान करें।यह खण्डग्रास ग्रहण भारतवर्ष, यूरोप के ज्यादातर देशों,उत्तरी- पूर्वी अफ्रीका और महाद्वीप के देशों ,अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, ईरान,इराक,यूक्रेन, स्वीडन, पाकिस्तान में यह ग्रहण दिखाई देगा। चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र, उज्जैन, वाराणसी, बिहार, पटना,कोलकाता, जालन्धर, अम्बाला, अमृतसर, लुधियाना, मोहाली, तरनतारन, होशियारपुर, दिल्ली, कानपुर, इंदौर,हिमाचल प्रदेश, कागड़ा,गंगटोक,गुड़गांव, चेन्नई, गोरखपुर, जयपुर, जोधपुर, विशाखापत्तनम, जेसमेर, देहरादून आदि खण्डग्रास सूर्य ग्रहण दृष्टि गोचर होगा।


             बुध, शुक्र, चंद्रमा, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो सभी सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य प्रकाश उत्सर्जित कर रहा है। चूँकि सूर्य भी एक तारा है और अपने चारों ओर परिक्रमा करने वाले ग्रहों की कक्षा की एक नाभि पर स्थित है, इसलिए इसे सौर मंडल कहा जाता है। पृथ्वी भी सूर्य के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के तहत सूर्य के चारों ओर घूम रही है।



           गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए और उन्हें कुछ मात्रा में रखना चाहिए।

1. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय बाहर नहीं घूमना चाहिए। 2. गर्भवती महिलाओं को बांधने वाले कपड़े पहनने चाहिए।
3. भोजन के रूप में ठोस खाने के बजाय रस को तरल पदार्थ के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।
4. ग्रहण के समय उसे नहीं सोना चाहिए।
5. हो सके तो भगवान के नाम का जाप करना चाहिए।
6. गर्भवती महिलाओं को किसी भी काम के आगे झुकना नहीं चाहिए।
7. गर्भवती महिलाओं को बैठकर काम नहीं करना चाहिए।
8. गर्भवती महिलाओं को भी कपड़े नहीं धोने चाहिए।
9. गर्भवती महिलाओं को चाकू या कैंची जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन चीजों का असर गर्भ में पैदा होने वाले बच्चे पर पड़ता है। उसका निशाना उसके शरीर पर पाया जाता है।
10. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसका असर उसके शिशु पर पड़ेगा। 1 1।
11.गर्भवती महिलाओं को न तो खाना बनाना चाहिए और न ही कुछ खाना चाहिए। 12. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान कभी भी मैथुन नहीं करना चाहिए, इससे संतान का बुरा संस्कार होता है। दान के दौरान गर्भवती महिलाओं को कार्य दान करना चाहिए।
13. मकर राशि की गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि शरीर के निचले हिस्से में कोई समस्या हो सकती है।

Saturday, May 7, 2022

16 मई, 2022 खग्रास चंद्र ग्रहण

 

     जब चंद्रमा आकाश में घूम रही पृथ्वी की छाया की कक्षा से होकर गुजरता है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह तभी होगा जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सभी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाएं। सूर्य और पृथ्वी हमेशा अण्डाकार पर होते हैं लेकिन चंद्रमा का मार्ग लगभग 5 डिग्री के कोण पर अण्डाकार की ओर झुका होता है ताकि जब पृथ्वी सूर्य और के बीच में हो तो चंद्रमा अण्डाकार पर या बहुत निकट हो या न हो। पूर्णिमा पर चंद्रमा। जब चंद्रमा अण्डाकार पर या उसके निकट हो और पृथ्वी उनके बीच में हो, तो ऐसी स्थिति तब होगी जब चंद्रमा या तो राहु या केतु पर या उनके पास हो क्योंकि राहु और केतु चंद्रमा के नोड हैं।

                                       



             जब चंद्रमा आकाश में घूम रही पृथ्वी की छाया की कक्षा से होकर गुजरता है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह तभी होगा जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सभी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाएं। सूर्य और पृथ्वी हमेशा अण्डाकार पर होते हैं लेकिन चंद्रमा का मार्ग लगभग 5 डिग्री के कोण पर अण्डाकार की ओर झुका होता है ताकि जब पृथ्वी सूर्य और के बीच में हो तो चंद्रमा अण्डाकार पर या बहुत निकट हो या न हो। पूर्णिमा पर चंद्रमा। जब चंद्रमा अण्डाकार पर या उसके निकट हो और पृथ्वी उनके बीच में हो, तो ऐसी स्थिति तब होगी जब चंद्रमा या तो राहु या केतु पर या उनके पास हो क्योंकि राहु और केतु चंद्रमा के नोड हैं।


। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण का मामला है। चंद्र ग्रहण तब तक नहीं हो सकता जब तक चंद्रमा की सतह का एक हिस्सा उम्ब्रा में प्रवेश नहीं कर लेता। ऐसा इसलिए है क्योंकि सूर्य के प्रकाश का चंद्रमा पर पड़ने वाला प्रकाश केवल कम होता है, सीधे नहीं रुकता; जबकि उम्ब्रा में सूर्य की कोई सीधी किरण प्रवेश नहीं कर सकती। इसकी चमक कम हो जाती है, फिर जब चंद्रमा आंशिक रेखा के किनारे पर होता है तो इसका आकार छोटा हो जाता है।

                                   


इस विक्रमी संवत 2079 दूसरा ग्रहण हैं।चन्द्र  मास वैशाख पूर्णिमा शुक्ल पक्ष योग परिघ दिन सोमवार चन्द्रमा वृश्चिक राशि और सूर्य वृषभ राशि में स्थित हैं।ग्रहण आरंभ होने का भारतीय मानक समय 7 बजकर 59 मिनट हैं।मिथुन लग्न आर्द्रा नक्षत्र, चन्द्रमा विशाखा नक्षत्र शनि  की दृष्टि राहु पर है और मंगल की दृष्टि सूर्य पर है। सूर्य भारतवर्ष की राशि वृषभ में अपने नक्षत्र कृत्तिका में स्थित हैं।चन्द्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक राशि में स्थित हैं।शनि-मंगल की युति कुम्भ राशि में होगी।खग्रास चन्द्र ग्रहण का मध्यकाल 9 बजकर 41 मिनट पर होगा और उस समय सूर्य 01:07 और चन्द्रमा 01:06 अंशो पर होंगे।खग्रास चन्द्र ग्रहण की समाप्ति 11 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका ,एशिया महाद्वीप कुछ स्थानों खग्रास चन्द्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।इंग्लैंड,फ्रांस, ब्राजील,नाइजीरिया, स्पेन आदि देशों पूर्ण से दिखाई देगा।वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों विशेष ध्यान रखें।यह चंद्र ग्रहण भारतवर्ष में दिखाई नहीं देगा | 


।चन्द्र ग्रहण शुक्ल पक्ष में ,सूर्य ग्रहण कृष्ण पक्ष घटित होगा। सेना का विद्रोह,और राजा का नाश होता हैं।यह ग्रहण स्थिर राशि और जल तत्व में घटित होगा ।देश में चक्रवात, और राज्यों सीमाओँ पर विवाद होगा। वृश्चिक राशि मे होने से उदुम्बर,मद्र और चौल देश निवासियों ,वृक्ष, अच्छे योद्धा और विष देने का नाश होता हैं।


Thursday, March 10, 2022

खण्डग्रास सूर्यग्रहण 30 अप्रैल 2022 को रात्रि 12 बजकर 15 मिनट 19 सेकण्ड

इस वर्ष 2022( विक्रम संवत2079 ) में ये   चार ग्रहण इस धरती पर दिखाई दृश्य और अदृश्य होंगे :- 

1 खण्डग्रास सूर्यग्रहण 30 अप्रैल 2022 को रात्रि 12 बजकर 15 मिनट 19 सेकण्ड यह ग्रहण भारतवर्ष में दिखाई नही देगा ।

 2. खग्रास चन्द्र ग्रहण 16 मई 2022 

3. खण्डग्रास सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर 2022 यह ग्रहण भारतवर्ष में दृश्य होगा।

 4. खग्रास चन्द्रग्रहण 8 नवम्बर 2022  को भारतवर्ष में दृश्य दिखाई देगा।

30 अप्रैल 2022 वैशाख मास आमावश्या दिन शनि अर्धरात्रि भारतीय मानक समय अनुसार सूर्य ग्रहण रात्रि 12 बजकर 15 मिनट पर यह ग्रहण प्रारम्भ होगा ।ग्रहण का कुल समय 3 घण्टे 52 मिनट 42 सेकेंड का होगा।ग्रहण का मोक्षकाल 1मई 2022 सुबह 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका,अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका के कुछ भागों में दिखाई देगा।

 खण्डग्रास सूर्य 30 अप्रैल 2022 वैशाख मास आमावश्या दिन शनि अर्धरात्रि भारतीय मानक समय अनुसार सूर्य ग्रहण रात्रि 12 बजकर 15 मिनट पर यह ग्रहण प्रारम्भ होगा ।ग्रहण का कुल समय 3 घण्टे 52 मिनट 42 सेकेंड का होगा।ग्रहण का मोक्षकाल 1मई 2022 सुबह 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

                      




यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका,अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका के कुछ भागों में दिखाई देगा। खण्डग्रास सूर्य अमेरिका के दक्षिण देशों में यह सूर्य ग्रहण खण्डग्रास की आकृति के रूप में दिखाई देगा

              सूर्य-चन्द्र-राहु मेष राशि में स्थित हैं।शनि-मंगल कुम्भ राशि में स्थित है शनि की दृष्टि सूर्य -चन्द्र और राहु के ऊपर है।जिसके कारण कई स्थानों पर दुर्भिक्ष की स्थिति बनेगी।यह समय राजनीतिज्ञों एवं देश के अनिष्ट कारक रहेगा ।प्राकृतिक आपदा और युद्ध के हालात बनते दिखाई देगे।शनि और मंगल के क्रूर प्रभाव पड़ते दिखाई देंगे।कही स्थानों पर प्रतिष्ठित व्यक्ति के अपदस्थ होने के योग है।

Sunday, November 28, 2021

4 दिसम्बर 2021 को आखिरी सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि

सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह से आ जाता है कि वह सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में बाधा डालता है। यह केवल उस समय हो सकता है जब चंद्रमा के केंद्र, सूर्य और पृथ्वी लगभग सीधी रेखा में हैं। उस समय सूर्य और चंद्रमा के देशांतर समान होते हैं। जैसा कि चंद्र ग्रहण में पहले ही समझाया जा चुका है कि पृथ्वी और सूर्य हमेशा अण्डाकार पर रहते हैं, जबकि चंद्रमा का रोहित एक गैल पर होता है। लगभग 5° का अण्डाकार होगा। इसलिए चंद्रमा हमेशा अण्डाकार पर नहीं होता है। यह ग्रहण पर होता है जब यह राहु और केतु के साथ मेल खाता है जो चंद्रमा के नोड हैं।

इसलिए, सूर्य ग्रहण के लिए दो आवश्यक शर्तें हैं और वही हैं: -


   1. चंद्रमा राहु या केतु में या उसके पास होना चाहिए।

   2. उस समय अमावस्या समाप्त होनी चाहिए।


                                 


    


4 दिसंबर 2021 को 10 बजकर 59 मिनट पर मार्गशीर्ष मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या, ज्येष्ठा नक्षत्र और वृश्चिक राशि का सूर्य ग्रहण शनिवार को लगेगा. यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा।यह ग्रहण खण्डग्रास के रुप मे अंटार्कटिकाअंटार्कटिका पृथ्वी का दक्षिणतम महाद्वीप, जिससे दक्षिणी ध्रुव है। के कुछ भाग दक्षिण अफ्रीका एवं दक्षिण अटलांटिक महासागर दिखाई देगा। यह केवल अंटार्कटिका में खग्रास के रूप में दिखाई देगा।खग्रास सूर्य ☀️ग्रहण का प्रारंभ 10-59:27 मकर राशि लग्न  में शनि स्थितहैं।वृश्चिकराशि  मे ग्रहण का प्रारंभ 10:59:28 राहु वृषभ राशि ♉ वृश्चिक राशि ♏सूर्य-चंद्रमा-बुध-केतु तीन ग्रह ज्येष्ठा नक्षत्र जिसका नक्षत्रपति बुध के पास है।केतु  अनुराधा नक्षत्र में नक्षत्र पति शनि हैं।राहु सूर्य के नक्षत्र कृत्तिका में स्थितहै।ग्रहण का कुल समय है। 13 बजकर 54 मिनट हैं।राहु-केतु 180° पर स्थित हैं।मंगल की दृष्टि शनि के ऊपर है।


वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह है।वृश्चिक राशि के स्वामी केतु व प्लूटो भी हैं।केतु भावनात्मक विस्फोटक व अनायास परिस्थिति परिवर्तन द्वारा होता है।वृश्चिक राशि बिच्छू की आकृति हैं।ज्येष्ठा नक्षत्र  का निवास स्थान दुर्गम मार्ग,गुप्त प्रदेशों में रहने वाली,उत्तरदिशा का अधीश ,जलचर व थलचर,तीखे डंक,शनि ग्रह इस स्थान के कारक ग्रहहैं।मानसिक बीमारी,दीर्घायु,शोक,दोष,मृत्यु,सरकार के सजा,विदेशी यात्रा,पति के सम्बन्धित रिश्तों,हानि,विधवापन,पाप,दुर्घटना,पति के द्वारा समस्या,गुप्तसम्बंध, ओसीक्यूलत विज्ञान,डीग्रेडेशन,कर्जे,मूत्ररोग,कफात्मक सम्बंधित रोग ,चन्द्रमा की नीच राशि हैं,केतु की उच्च होते है।ज्येष्ठा नक्षत्रपति बुधग्रह हैं।यहाँपर अपने दोषों यथा छल-कपट,धोखा,दोषों के निराकरण व शुद्धिकरण होता हैं।उष्ण कटिबंध वन,सरकारीजमीन,भवन,दूर संचार,टीवी प्रसार केंद्र,समाचार पत्र मुद्रणालय,विमान का तल,सेना,महानगरों की राजधानी वाले नगर,वृद्धआश्रम को देख जा सकता है।सूर्य-चन्द्रमा नीच व अस्त अवस्था मे -बुध अस्त -केतु -राहु के दृष्टि और आकाश मण्डल में चार ग्रहो की युति दुर्भिक्ष,सत्ता परिवर्तन,रक्तपात,सम्प्रदायिक उपद्रव एवं भूकंप आदि के संकेत दे रही हैं।

चंद्र ग्रहण में दो ग्रहण और अन्य सूर्य सोलहवें दिन के दौरान होते हैं और राजा 👑 नष्ट हो जाते हैं।ग्रहण का अशुभ प्रभाव उन देशों में सक्रिय होता है जिन देशों में यह दृष्ट होता है। वृश्चिक एक स्थिर राशि होने पर इसका दुष्प्रभाव लम्बे समय तक रहेगा।वृश्चिक राशि में ग्रहण होने से उदुम्बर, मद्र और चोल देश के निवासियों, वृक्ष श्रेष्ठ योद्धा और विष देने वालो नाश होता है।

Saturday, May 15, 2021

26 मई, 2021 खग्रास चंद्र ग्रहण

 जब चंद्रमा आकाश में घूम रही पृथ्वी की छाया की कक्षा से होकर गुजरता है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह तभी होगा जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सभी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाएं। सूर्य और पृथ्वी हमेशा अण्डाकार पर होते हैं लेकिन चंद्रमा का मार्ग लगभग 5 डिग्री के कोण पर अण्डाकार की ओर झुका होता है ताकि जब पृथ्वी सूर्य और के बीच में हो तो चंद्रमा अण्डाकार पर या बहुत निकट हो या न हो। पूर्णिमा पर चंद्रमा। जब चंद्रमा अण्डाकार पर या उसके निकट हो और पृथ्वी उनके बीच में हो, तो ऐसी स्थिति तब होगी जब चंद्रमा या तो राहु या केतु पर या उनके पास हो क्योंकि राहु और केतु चंद्रमा के नोड हैं।



जब चंद्रमा आकाश में घूम रही पृथ्वी की छाया की कक्षा से होकर गुजरता है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह तभी होगा जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सभी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाएं। सूर्य और पृथ्वी हमेशा अण्डाकार पर होते हैं लेकिन चंद्रमा का मार्ग लगभग 5 डिग्री के कोण पर अण्डाकार की ओर झुका होता है ताकि जब पृथ्वी सूर्य और के बीच में हो तो चंद्रमा अण्डाकार पर या बहुत निकट हो या न हो। पूर्णिमा पर चंद्रमा। जब चंद्रमा अण्डाकार पर या उसके निकट हो और पृथ्वी उनके बीच में हो, तो ऐसी स्थिति तब होगी जब चंद्रमा या तो राहु या केतु पर या उनके पास हो क्योंकि राहु और केतु चंद्रमा के नोड हैं।

। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण का मामला है। चंद्र ग्रहण तब तक नहीं हो सकता जब तक चंद्रमा की सतह का एक हिस्सा उम्ब्रा में प्रवेश नहीं कर लेता। ऐसा इसलिए है क्योंकि सूर्य के प्रकाश का चंद्रमा पर पड़ने वाला प्रकाश केवल कम होता है, सीधे नहीं रुकता; जबकि उम्ब्रा में सूर्य की कोई सीधी किरण प्रवेश नहीं कर सकती। इसकी चमक कम हो जाती है, फिर जब चंद्रमा आंशिक रेखा के किनारे पर होता है तो इसका आकार छोटा हो जाता है।

                                   

                   

26 मई, 2021 को 15:15  भारतीय मानक समय  वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा बुधवार के दिन पर चन्द्र वृश्चिक  और सूर्य वृष राशि में और अनुराधा  नक्षत्र में होगा। प्रत्येक चंद्र ग्रहण होने से पहले चंद्रमा का कोई ग्रहण नहीं होता है, चंद्रमा को पृथ्वी की चट्टान में प्रवेश करना चाहिए, जिसे खग्रास  चंद्र ग्रहण के रूप में भी जाना जाता है। तभी वह पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है। यह तब होता है जब वास्तविक ग्रहण होता है। चंद्रमा का पृथ्वी पर संक्रमण चंद्र ग्रहण कहलाता है। ग्रहण बुधवार  को पूर्णिमा (पूर्णिमा) के दिन होगा। ग्रहण का प्रारम्भ सांयकाल 3 बजकर 15 मिनट आरम्भ होगा यह चंद्र  ग्रहण  पश्चिमी -बंगाल , अरुणाचल , नागालैण्ड ,पूर्वीउड़ीसा , मिजोरम , मणिपुर , आसाम , त्रिपुरा तथा मेघालय में चंद्र ग्रस्तोदय रूप में बहुत कम समय के लिए दिखाई देगा \कुछ मिनटों में समाप्त हो जाएगा / भारत के उत्तरी पूर्वी क्षत्रो में ग्रहण मोक्ष काल के समय दिखाई देगा / का चरम बिंदु रात 16 :48  रहेगा। ग्रहण का मोक्ष काल  18 :22 बजे होगा। इस समय, केवल चंद्रमा की छाया की छवियों में हल्की छाया दिखाई देगी। यह ग्रहण भारत,,पूर्वी  एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक सागर ,  अमेरिका,  क्षेत्रों में दिखाई देगा।


                       यह  चन्द्रग्रहण का विशेष प्रभाव भारतवर्ष के पूर्वी प्रदेशों में वृश्चिकराशि जातकों, प्रदेशों, देशों के राष्ट्र नेताओं के कठिन हालात पैदा करेगा।भारतवर्ष में बिहार, उड़ीसा, बंगाल के राजनेताओं केलिए घातक साबित होगा।शनि-मंगल समसप्तक योग का निर्माण कर रहे हैं । देश में युद्ध की स्थिति, प्रजा को रोग से भय, ब्राह्मणों में भय,वर्षा की कमी,मध्यक व्यसनों के सेवन करने वालो के कष्ट प्रद रहेगा।पूर्वी एशिया देशो में विशेष उपद्रव होंगे।

28 अगस्त, 2026 आंशिक चंद्र ग्रहण श्रावण मास पूर्णिमा

    28 अगस्त, 2026 को भारतीय मानक समय से सुबह 08:04 से 11:43 के बीच आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण का बीच का समय 9:43 मिनट होगा। सूर्य...